विहिप ने की बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को सौपा ज्ञापन

सूरजपुर। वक्फ कानून के विरोध की आड़ में बंगाल में हो रही हिसा ओर, हिंदुओं को प्रताड़ित करने की घटना से बिफरे विश्व हिंदू परिषद ने राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौपकर हस्तक्षेप व कार्यवाही के साथ राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। विहिप ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि बंगाल में राष्ट्र विरोधी और हिंदू विरोधी तत्वों को निर्बाध रूप से अपने षडयंत्रों को क्रियान्वित करने की खुली छूट दी जा रही है। बंगाल की स्थिति अत्यधिक चिंताजनक है। मुर्शिदाबाद से प्रारम्भ हुई यह भीषण हिंसा अब संपूर्ण बंगाल में फैलती हुई दिखाई दे रही है। शासकीय तंत्र दंगाइयों के सामने केवल निष्क्रिय ही नहीं अपितु कई स्थानों पर इनका सहायक या प्रेरक बन गया है। इससे पहले कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए, केंद्र सरकार को प्रशासन का नियंत्रण व संचालन अपने हाथ में लेकर राष्ट्र एवं हिंदू विरोधी तत्वों को उनके कुकर्मी के लिए कठोरता सजा दिलवानी चाहिए। मुस्लिम भीड़ द्वारा वक्फ कानून के विरोध के नाम पर किया गया हिंसक प्रदर्शन कानून बनाने वाली सरकार के विरोध में नहीं अपितु हिंदुओं पर हिंसक आक्रमण के रूप में था जबकि हिंदू समाज का इस कानून के निर्माण में कोई भूमिका नहीं थी और यह एक शुद्ध संवैधानिक प्रक्रिया थी। इसका स्पष्ट अर्थ है कि वक्फ तो केवल बहाना था, असली उद्देश्य मुर्शिदाबाद को हिंदू शून्य बनाना था। हिंसक प्रदर्शन कर हिंदुओं के 200 से अधिक घरों और व्यावसायिक दुकानों को लूटकर जलाया, सैकड़ो हिंदुओं को बुरी तरह घायल किया व तीन नागरिकों की निर्मम हत्या की गई। दर्जनों महिलाओं के शीलभंग भी किए गए। परिणाम स्वरूप 500 से अधिक हिंदू परिवारों को मुर्शिदाबाद से पलायन करना पड़ा। उनके पास जाकर उनकी चिंता एवं सहायता करने की अपेक्षा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दंगा भड़काने वाले इमामो से मिल रही है जिनमें से एक इमाम ने एक दिन पहले ही धमकी दी थी कि “अगर ममता बनर्जी ने उनका साथ नहीं दिया तो वह उसकी औकात बता देंगे। ममता अब शरणार्थियों को सुविधा देने की जगह उनको वापस जेहादिर्या के सामने जबरन परोसने का षड्यंत्र कर रही है। आज की बंगाल की स्थिति से यह स्पष्ट है कि ममता सरकार भारत के संघीय ढांचे को बंगाल में ध्वस्त कर अपनी सरकार और वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है। बंगाल में राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में आ चुकी है। बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को निर्बाध रूप से आने दिया जा रहा है। उनके आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं। पाकिस्तानी तथा बांग्लादेशी आतंकी संगठनों की सक्रियता और हिंदुओं के प्रति हिंसा बढ़ती जा रही है। वहां न्यायालय के आदेश पर ही हिंदू त्योहारों को अनुमति मिल पाती है। उनको सुरक्षा देने वाले अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाया जाता है। हिंदू का अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है। कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से नष्ट हो चुकी है। तृणमूल के असामाजिक तत्व व जिहादी गुंडों के नियंत्रण व निर्देश पर ही प्रशासन काम करने के लिए विवश है। यह हिंसा मुर्शिदाबाद से निकलकर संपूर्ण बंगाल में फैलती जा रही है। विहिप ने कहा है कि देश के जनता की मांग है कि बंगाल में अविलंब राष्ट्रपति शासन लगाया जाए, बंगाल की हिंसा की जांच एन आई ए द्वारा करवाई जाए और दोषियों को अविलंब दंडित किया जाए। बंगाल की कानून व्यवस्था का संचालन केंद्रीय सुरक्षा बलों के हाथों में दिया जाए।. बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनको निष्कासित किया जाए। बंगाल व बांग्लादेश की 450 किलोमीटर की सीमा पर तार लगाने का काम अविलंब प्रारंभ किया जाए जिसे ममता बनर्जी ने रोका हुआ था। राष्ट्र की सार्वभौमिक्ता और साम्प्रदायिक सदभाव बनाये रखने के लिए अविलम्ब और त्वरित कार्यवाही करने की मांग राष्ट्रपति से की गई है। इस दौरान बड़ी संख्या में हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
