चर्चित तिलसिवा अतिक्रमण मामले का एक और पहलू बरसती पानी व आंधी तुफान में खुले आसमान के नीचे गुजरी रात, मानवीय संवेदना हुई तार-तार

अतिक्रमण कैसे तब्दील हुआ दर्जनों घरों के रूप में, जिला मुख्यालय से चंद कदमों कि दूरी पर स्थित बहुचर्चित तिलसिवा में अतिक्रमण हटाने से जुड़े मामले में अब तक सामने आई गतिविधियों में सामने आता सवाल,जवाबदेहों की खामोशी कैसे होगी निष्पक्ष तौर पर जांच

सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव।नौतपा की तपिश के बीच बदलें मौसम का मिजाज से खुलें आस्मां के नीचे परिवार के सदस्यों साथ पूरा रात गुजारी वहीं चंद कदमों कि दूरी पर जिला मुख्यालय का दफ्तर होने के बाद भी किसी ने इनकी सुध लेने तक कि जहमत नहीं उठाई।आपकों बताते चलें कि अवैध अतिक्रमण खाली कराने के दरम्यान बीते दिनों सूरजपुर शहर की सरहद से लगें तिलसिवा में अवैध अतिक्रमण खाली कराने के दरम्यान पुलिस के साथ हुई झूमा झटकी का मामला राष्ट्रीय पटल पर गुंज रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर सबसे अहम सवाल कि आखिर शुरूआती दौर में जवाबदेहों ने मुद्दे को संजीदगी से लेकर दायित्वो पर संजीदगी दिखाई होती तो संभवतः ऐसा मामला ही खड़ा नहीं हो पाता, शांत फिजाओं वाले ग्रामीण परिवेश में जनाक्रोश तूल पकड़ने पर प्रशासन कि दोहरीनीति के तहत खुद को सक्रिय पेश करने कि होड़ में पुलिस बल को लेकर तोड़फोड़ कि कार्यवाही शुरू हुई।इस दरम्यान पूर्व में बरती गई लापरवाही कहे या बेपरवाही का मंजर कड़े प्रतिरोध में तब्दील होकर ग्रामीणों के अलावा।
अवैध कब्जाधारियों का झेलने और इस दरम्यान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूदा पुलिस बल को चुनौतीपूर्ण हाल में छोड़कर चुपचाप अपने दफ्तर की राह पकड़ने से जुड़ी हालातों पर बारीकी से समझें तो मामले पर सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर अतिक्रमण किसने कराई वह भी एक दों नहीं दर्जन भर से अधिक मकान बनने व उसमें लोगों के रहने में गुजरें समयावधि में आखिर कौन सी ऐसी मजबूरी रही कि जिला मुख्यालय के चंद कदमों पर पटवारी से लेकर तमाम जवाबदेह कर्मियों द्वारा बिचौलियों के साथ सांठगांठ कर शुरुआती दौर में किसी तरह से रोकाटाकी ना कर, तेजी से निर्मित मकानों कि संख्या में बढ़ोतरी दर्ज होने पर स्थानीय ग्रामीणों में फैला जनाक्रोश बढ़ने लगा और जब कलेक्टर के समझ पंचायत के सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सक्रियता बरती होती तो संभवतः ऐसे हालात निर्मित नहीं होते।
बहरहाल मामले में अतिक्रमण करने वाले लोगों को वहां पर किसने और किसके संरक्षण पर भूमि आशियाना बनाने के लिए दिया गया और बिचौलियां बतौर किसकी किसकी भूमिका संदिग्ध है क्या इस विषय पर गंभीरता से लेकर वर्तमान में सूरजपुर कलेक्टर अपने मातहतों पर सख्ती बरतेंगे जिससे ऐसी स्थिति किसी और क्षेत्र में निर्मित ना हो और ऐसे हालात निर्मित करने में बेपरवाही हुई तो बेपरवाही बरतने पर कार्यवाही व जांच में किसके दवाब में आकर चर्चित जमीन बिचौलियों व राजस्व कर्मियों को बचाने में पूरी ताकत प्रशासनिक अमला झोक रहा है।
मानवीय संवेदना हो रही तार -तार
दरअसल चर्चित मामले में अतिक्रमण हटाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा मोर्चा खोलने पर आग लगने पर कुआं खोदने की तर्ज पर हुई कार्यवाही के बाद खुले आसमान के नीचे तिरपाल तले कई परिवारों के पास रहने के अलावा विकल्प नहीं बचने से इनकी मानवीय संवेदना जैसे गंभीर विषय पर कम से कम प्रशासनिक अधिकारियों कि टीम ने सोंचने में अबतक गुजरें अरसे में खुद की छवि बचाने से जुड़ी होड़ तले दबकर किसी कोने में अपनी दर्द भरी दास्तां जिसमें नौतपा की तपिश और फिर शनिवार को मौसम में अचानक आएं बदलाव से आंधी तुफान के जद में आने से पेट की भूख मिटाने के लिए बनें खाना से लेकर अन्य खाद्य सामग्री खराब होकर एक कोने में अपनी बेबसी कि कहानी बयां कर रही है।
बताया जा रहा है कि मौसम के बदले मिजाज के बाद दोपहर में खाना खाने के बाद शाम को अचानक आंधी तुफान के कहर तले रात का भोजन यानी खाना चपेट में आने से पूरी रात खाली पेट खुलें आस्मां के नीचे गुजारने की मजबूरी पर अबतक प्रशासनिक टीम में किसी अधिकारी या कर्मचारी का ध्यान नहीं जाना खुद में एक बड़ा सवाल इनकी मौजूदगी व दायित्व निर्वहन को लेकर सक्रियता से जुड़ी हकीकत का दर्पण पेश कर रही है।
